भारतीय शिक्षा बोर्ड का क्या आवश्यकता है?

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भारत में शिक्षा हमेशा से ज्ञान और संस्कृति का मुख्य स्रोत रही है। समय के साथ शिक्षा प्रणाली में कई परिवर्तन हुए, लेकिन आधुनिक शिक्षा ने पारंपरिक भारतीय मूल्यों और वैदिक ज्ञान को पीछे छोड़ दिया। ऐसे समय में भारतीय शिक्षा बोर्ड की आवश्यकता इसलिए महसूस होती है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी न केवल आधुनिक विषयों में दक्ष हो बल्कि अपने संस्कृति और मूल्यों से भी जुड़ी रहे।

1. भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य

भारतीय शिक्षा बोर्ड का मुख्य उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वैदिक और भारतीय सांस्कृतिक शिक्षा भी दी जाए। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • विद्यार्थियों को गणित, विज्ञान, अंग्रेज़ी, सामाजिक विज्ञान जैसे आधुनिक विषय पढ़ाना।
  • वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य वैदिक ग्रंथों का अध्ययन कराना।
  • योग, ध्यान और भारतीय संस्कृति को शिक्षा का हिस्सा बनाना।
  • ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना जो बच्चों में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का विकास करे।

2. आधुनिक और वैदिक शिक्षा का समन्वय

आज की अधिकांश कॉन्वेंट और आधुनिक स्कूलों में पश्चिमी शिक्षा प्रणाली अपनाई जाती है, जिसमें भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता की कमी है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड की विशेषता यह होगी कि:

  • जो पढ़ाई कॉन्वेंट स्कूलों में होती है, वह जैसे की तैसे रहेगी।
  • साथ ही उसमें वेद, पुराण, योग, संस्कृत और भारतीय इतिहास को जोड़ा जाएगा।
  • इस तरह बच्चों को संतुलित शिक्षा मिलेगी, जिसमें वे आधुनिक प्रतिस्पर्धा में भी आगे रहेंगे और अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे।

3. भारतीय शिक्षा बोर्ड की आवश्यकता क्यों?

भारतीय शिक्षा बोर्ड की आवश्यकता निम्न कारणों से उत्पन्न हुई:

  1. संस्कृति संरक्षण: नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से दूर होती जा रही है।
  2. समग्र विकास: केवल आधुनिक शिक्षा बच्चों के बौद्धिक विकास तक सीमित रहती है, जबकि वैदिक शिक्षा उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत बनाती है।
  3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा: आधुनिक और वैदिक शिक्षा का संयोजन छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाता है।
  4. नैतिक मूल्यों का विकास: वैदिक शिक्षा बच्चों में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन जैसे गुणों का विकास करती है।

4. अंतिम शब्द

भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन हमारे शिक्षा तंत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इससे छात्र न केवल आधुनिक शिक्षा में सक्षम होंगे बल्कि वे अपने संस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी समझ पाएंगे। इस प्रकार, यह शिक्षा प्रणाली बच्चों को वैश्विक नागरिक बनाने के साथ-साथ उन्हें भारतीय संस्कृति के रक्षक के रूप में भी तैयार करेगी।

जब आप अपने बच्चों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़े विद्यालयों में पढ़ाएंगे तो वो आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक शिक्षा भी प्राप्त करेंगे जिसके फल स्वरुप बच्चों के अंदर संस्कार आएगा और वो आपका एवं समाज का आदर भी करेंगे एवं एवं देश एवं धर्म के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।

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